आज जो बिछड़ने की बातें कर रहे हो,

क्यों ना ये बातें तुम अधूरी छोड़ जाओ,

हां! ये मुलाकाते भी तुम अधूरी छोड़ जाओ,

आएगी जब अड़चने दिलों पर,

तो हम-तुम मिल के सुलझाएंगे,

क्यों ना ये बंदगी भी तुम अधूरी छोड़ जाओ,

हां! ये ज़िंदगी भी तुम अधूरी छोड़ जाओ,


"इन्द्राज योगी"