अपनी बदकिस्मती को जगाकर सो गए, 

मजदूर सड़क पर अखबार बिछाकर सो गए ।


सुबह से शाम तक जिसके लिए बदन तोड़ा, 

उसी मालिक की डांट खाकर सो गए ।


जी बहुत चाहा कि रोके दिल हल्का करे, 

फिर बच्चों को देखा ओर मुस्कुरा कर सो गए ।


ख्वाब मैं आएगी परियां रोटियां लेकर 

बच्चो के ये जूठा दिलासा देकर सो गए 


नन्ही जान ठिठुरती रही रात भर हमे क्या, 

हम तो बस अपने घरों की बत्ती बुझाकर सो गए ।