जेठ मे यूँ सावन की बाते 

सारी जुमलेपन की बाते 


देश के हित मे कब बोलोगे 

कब तक होगी मन की बाते 


बुलेट ट्रैन मे कल बैठेंगे 

आज करो राशन की बाते 


याद नहीं है क्या अब तुमको 

की थी काले धन की बाते 


बेफिजूल सी लगती तुमको 

वैक्सीन, ऑक्सीजन की बातें 


लाज़ हया कुछ  आती है जब 

सुनते हो दर्पण की बाते