नाजाने कहाँ है मेरी मंजिल ,अक्सर रोज पता पूछते हैं:– लोग ,मैं खुद हैरान हूँ:- आखिर जाना कहाँ है ,मेरे दर-बदर भटकने की खता पूछते हैं:– लोग ,
नाजाने कहाँ है मेरी मंजिल ,अक्सर रोज पता पूछते हैं:– लोग ,
मैं खुद हैरान हूँ:- आखिर जाना कहाँ है ,मेरे दर-बदर भटकने की खता पूछते हैं:– लोग ,