यह राग फिर से छेड़ा है, यह दांव फिर से खेला है, फिर मोहब्बत हो गयी है उनसे, फिर से ये दीवाना अकेला है। है एक तरफा ये प्यार मेरा, वर्षों से पड़ा झमेला है, एक बार तो नज़र इधर करदे, आशिक़ यह बड़ा अलबेला है। फिर मोहब्बत हो गयी है उनसे, फिर से ये दीवाना अकेला है। अब काश के वो समझे मुझको, कि वो ही हमसफर अकेला है, फिर मोहब्बत हो गयी है उनसे, फिर से यह दीवाना अकेला है। - कौस्तव सिंह।