(ये मुमकिन है)



ये मुमकिन है कि

मुझे और मुझ जैसे लोगों को

हर बात में हाँ, जी हॉं कहने की 

आदत पड़ जाये


ये जानते हुए भी कि

जो हो रहा है 

जो कहा जा रहा है 

जो दिखाया जा रहा है 

वो सही नहीं है 

जो बिल्कुल भी सत्य नहीं है 


फिर भी हमें गर्दन

सीधी हिलाने की आदत पड़ जाये

ये मुमकिन है 


एक नौकर का

मालिक के हाँ में हॉं मिलाने की आदत 

एक बेकसूर का 

पुलिस के हाँ में हॉं मिलाने की आदत

एक मरीज का

डॉक्टर के हाँ में हॉं मिलाने की आदत


ये जानते हुए भी 

जो हो रहा है 

जो कहा जा रहा है 

जो दिखाया जा रहा है 

वो सही नहीं है 

जो बिल्कुल भी सत्य नहीं है 


न कहने की गुंजाइश 

बस इस शर्त पर बची रहे कि

न कहने वाले की जीभ काटी जा सके

उसका सर क़लम किया जा सके


ये मुमकिन है कि

ये करने की ज़ुर्रत 

किसी में न बची रहे 


और सब छोड़ दिया जाये

ये कहकर कि 

जो हो रहा है 

जो कहा जा रहा है

जो दिखाया जा रहा है

बस वही सत्य है


- साहिल मिश्रा