
खेतों में लहराते फसल
और हँसता हुआ किसान
अरसे बीत गए इनकी
इन्हीं मुस्कान को देखे हुए
खेतों से संगीत के बजाए,
अब मौत के किससे सुनाई देते हैं
अब डर से कोई किसी कोने में
नीम का पेड़ भी नहीं लगाता
न ही खेतों
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