जब सड़के चुप और रातें सुनसान होती हैं किसी शहर में कोई लड़की लहूलुहान होती है   हर गली में कई खरीदार हैं उसके मानो वो हवस की दुकान होती है   बेच देते हैं  सब आबरू को उसकी मानों खेलने की वो कोई सामान होती है     वो नन्हीं सी गुड़िया तो हर शहर में मिल जाएगी कभी वो दिल्ली तो कभी हिंदुस्तान होती है     हर तबका उसे धर्म से जोड़ लेता है कभी वो हिन्दू तो कभी मुसलमान होती है