मुफ़लिसी में रहना चलो सीख लेते हैं
घुट घुट के जीना चलो सीख लेते हैं।
तुम बहुत रोओगे वक़्त ऐसा भी आएगा
आंखों को भिगोना चलो सीख लेते हैं।
बेबसी में जब लोग हंसेंगे तुमपर
खुद पर हंस लेना चलो सीख लेते हैं।
चार कांधे ही मिलेंगे तुम्हारे भी मरने पर
जनाज़े में शरीक होना चलो सीख लेते हैं।
उन वादों का क्या हुआ,ये सवाल पूछा जाएगा
कुछ वादों को निभाना चलो सीख लेते हैं।
जब उठेगा धुंआ ग़म ओ सितम बनकर
बादल सा बरसना चलो सीख लेते हैं।
गोलियां ख़ूब चलेंगी हुक्मरानों के कहने पर
सीने पर गोली खाना चलो सीख लेते हैं।
वक़्त बदलेगा और तुम्हें बदल देगा "साहिल"
उस वक़्त में बदलना चलो सीख लेते हैं


