मेरे टेबल पर रक्खा वो चाभी का गुच्छा
ज़ोर चलाता है बहुत वो चाभी का गुच्छा
टांगता जब भी हूँ तेरे तस्वीर के आगे
तुरंत गिर जाता है वो चाभी का गुच्छा
याद आती है जब तू और तेरी मोहब्बत
मुझे खूब चिढ़ाता है वो चाभी का गुच्छा
सोचता हूँ खोल लूं तेरे दिए हुए तौफे को
बहुत नचाता है मुझे वो चाभी का गुच्छा


