ना तु आती है ना तेरी याद जाती है ये कैसा इश्क़ है जो सिर्फ मुझे रुलाती है सफ़र दर सफ़र तन्हा रहा हूँ मैं एक तू है जो हर दिन महफ़िल सजाती है ईक पल ठहर जा, दो बातें कर ले इश्क़ में हूँ मैं, कुछ मेरी भी सुन ले रोज़ सज-धज कर आती हो सपने दिखाने को फिर छोड़ चल देती हो सपने संजोने को हो रहा है गुनाह मुझसे, मुझे है ख़बर पर इस दुनिया का क्या वो तो मेरी धुन ले टूट रहा हूँ धीरे-धीरे सुखी टहनियों सा जलाने को ही सही एक बार तो चुन ले हो जाऊंगा बेखबर एक दिन उससे पहले तो खबर ले तुझे हर आरज़ू से मिलाऊँगा थोड़ी तो सबर ले तेरी हर ख्वाहिश की समझ है नासमझ ना समझ तुझे वहां तक ले जाऊँगा जहाँ का ना है तुझे समझ वक़्त आ गया है थक रहा हूँ मैं अपने ही आगोश में सिमट रहा हूँ मैं यहाँ की भीड़ से निकल जाना चाहता हूँ देह के बाँयी ओर से टूट रहा हूँ मैं मालूम है मुझे ख़बर तुझ तक पहुँच चुकी है अब क्यूँ घबराती है एक मैं हूँ जो सारी यादें समेटे जा रहा हूँ एक तू है जो अब भी पछताती है ना तू आती है ना तेरी याद जाती है ये कैसा इश्क़ है जो सिर्फ मुझे रुलाती है