
नीला दुपट्टा ओढ़ा उसने तो ऐसा लगा जैसे समंदर को चेहरा मिल गया
नीली नज़रों से जब देखा उसने तो मानो
आसमान चूर होकर मुझपर नीली छाप छोढ़ गया
लफ़्ज़ों की ज़रूरत नही उसकी तारीफ़ के लिए
उसकी तारीफ मे इस नज़्म की स्याही नीली
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