आप की महफ़िल में हमको गवारा कौन करेगा
आप ठहरे अना के मरीज़ आप का चारा कौन करेगा
इश्क़ की बुनियाद कि महबूब के नक़्श-ए-पा पे चल
अब चार कपड़ों में ज़िन्दगी का गुज़ारा कौन करेगा
जब उथले गड्डों से पूरी होने लगे ज़ेहन की ज़रुरत
तब अपने किरदार को इदारा कौन करेगा
क़ल्ब पे मोहर सही, ज़ेहन पर तो नहीं
इल्म को है मेहनत की दरकार तो यह कारा कौन करेगा


