अश्क़ आंखों में छुपाते हुए रो पड़ते हैं। हम तेरे ख्वाब मिटाते हुए रो पड़ते हैं।। गुज़िश्ता लम्हों की एक गठरी ले कर गाँव से शहर में आते हुए रो पड़ते हैं।। नर्म उंगली से जो लिखी थी मेरे सीने पर , अब वो तहरीर मिटाते हुए रो पड़ते हैं।। किरचें बिखरी हैं तेरी यादों की हर सू, सर-ए-शाम कमरे में जाते हुए रो पड़ते हैं।। इस क़दर मेरे 'किरदार' को मौत आई है, खुद से ही आँख मिलाते हुए रो पड़ते हैं।। #रक़ीब