संविधान अब बोलता नही है 


रुको , ज़रा ठहरो 

विचार करो , फिर निर्णय लो 

मन टटोलो , दिमाग़ से बोलो 

अपने लिए

दूसरों के बारें में

अरे भाई संविधान ने बोला है  


पर अब 

संसद चलता कहाँ है 

संविधान रुक गया है

सांसदों में ठहराव कहाँ है 

संविधान ठहर गया है,

संसदीय वाद-विवाद किसी के विचारों में नही 

संविधान बेचारा विचारहीन हो गया है

संसद में अब एकतंत्र निर्णय होते हैं

संविधान गणतंत्र नही, एकतंत्र जो हो गया है


दुःखद

अब संविधान बोलता नही है ।। 

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