द्रौपदी तो आज भी लूटती है

फिर नारायण क्यों नहीं आते हैं

दुःशासन केश पकड़ता है तो

नारायण क्यों नहीं बचाते हैं

क्या उस युग में ही कुछ बात थी वो

कि भगवन दरस दे जाते थे

नारी तब नहीं अबला थी

ऋषि वरदान सहस्त्र दे जाते थें।


माधव कहाँ तुम सोये हो

चित्कार नहीं सुन पाते नारी की

साड़ी खींचते हैं देखो ये दुष्ट

लाज बचा लो बेचारी की।

एक प्रार्थना करती नतमस्तक

तुमसे कलियुग की हर नारी

जब भी नारी के अम्बर को

कोई दुःशासन हाथ लगाए

वर दो हे नारायण-

वो क्षण में भस्म हो जाए

जब भी कोई भीष्म पितामह

अत्याचार पर मौन ग्रहण करे

जब भी कोई द्रोण अपने शिष्यों के

पापो को सहन करे

नारायण तुम वचन दो

ऐसे घोर अपराध का

तुम न्याय दिलवाने आओगे

महाभारत का एक नया अध्याय लिखवाने आओगे।

द्रौपदी के केशों को फिर से 

रक्तपान करवाने आओगे

इस सृष्टि को फिर से तुम

पापमुक्त बनाने आओगे।


- ह्रषीता ‘दिवाकर’