देखो इस आशिकी में

हम दोनों बदनाम हो गए न

बदनाम हुए और बेपर्दा

सरे-आम हो गए न

इश्क निभाने में हम दोनों

किसी के लिए तो बेइमान हो गए न

भला हो उस बला की तूफ़ान का-

जो हमदर्द बने फिरते थे तुम्हारे

सब अनजान हो गए न

तुम्हारे क़त्ल की चाह रखता है जो 

साथी सभी तुम्हारे

उस पर मेहरबान हो गए न

चलो कोई बात नहीं

इस शोर शराबे में ही सही

हम तुम्हारे तो तुम हमारे

नाम हो गए न

-ह्रषीता ‘दिवाकर’ गुप्ता