पल भर की उम्र और कोरे

पन्ने सा मन ,


आँखो ने देखा भी नहीं था

धुँधलेपन को ,

त्यों ही

पकड़ा दिया अपने प्यार से बंधे

कांटो का गहना ,


कहा जो


मेरे मन में जन्मे ख्याल है बस

वें ही तो तुम्हारे जीवन के तप है।

उन्हें ही तुम्हे जीना है ,जब तक

जीना है।


मै उनके सपनो के छिपे दलदल

को प्यार की गठरी में बांधकर

उस छोटे से मस्तिष्क में रोज

लड़ता हूँ।