Poetry 1 min read 623.9K reads

saal


लिखना अब भूल गया हूंसाल की तरह बीत गया हूँसोचता हूँ की कहीं रुकुजाते और आते हुए साल के बीच मेंऔर लिखूं कुछ ऐसा जो तुम्हें लगे तुम्हारे जैसा

हर्षित @ekkaavaaz

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