तू क्यों रुकी है बेवजह

रूठे इस वक़्त की तरह ?

ज़िन्दगी,

क्या रिश्ता है तुम्हारा इस पल से,

जायज़ है या नाजायज अधूरे इश्क़ की तरह ?

हितेश