मुझे नफ़रत हो गयी उस शहर से ।।
जहाँ ख़ून पसीना बहाया था
माँगा ही क्या था मेने
सिर्फ़ दो वक़्त की रोटी
वह भी नही दे पाया था
मुसीबत मे आज मेरा
गाँव ही काम आया था
मुझे नफ़रत हो गयी उस शहर से
जहाँ ख़ून पसीना बहाया था ।।
मुझे नफ़रत हो गयी उस शहर से ।।
जहाँ ख़ून पसीना बहाया था
माँगा ही क्या था मेने
सिर्फ़ दो वक़्त की रोटी
वह भी नही दे पाया था
मुसीबत मे आज मेरा
गाँव ही काम आया था
मुझे नफ़रत हो गयी उस शहर से
जहाँ ख़ून पसीना बहाया था ।।