मुझे शिकायत है उस सरकारी फाइल की धूल से डॉक्टर की एक मामूली भूल से मिड डे मील के बासी भात से गुडगाव में कैसी भी बरसात से मुझे शिकायत है सुबह शाम के बम्पर टू बम्पर जाम से Municipality के बेमतलब आराम से एहसानफरामोश कश्मीर के आवाम से दिल्ली को डराने वाली उस शाम से मुझे शिकायत है राजीव चौक के रेले से हर साम्प्रदायिक मेले से एक नेता के पलटते बयान से तारे छिपाए धुंदले आसमान से मुझे शिकायत है महिला आयोग की बड़ी बिंदी से होर्डिंग पे लिखी गलत हिंदी से मीटर से ना चलने वाले ऑटो से वृद्धों का अनादर करने वाले छोटों से मुझे शिकायत है जबां से माँ बहन के टुच्चे संवादों से हवाई नेताओं के झूठे लफ्फाजी वादों से रातों में मजबूर जिस्म खरीदते शख्स से आईने मे मुस्कुरा कर मिलते अक्स से मुझे शिकायत है सुबह नींद को परेशां करती धूप से आदम के वहशी हो जाते उस रूप से गड्डों में सड़के ढूंडती कारों से दफ्तर से लौटने पे मिली बंद बाजारों से मुझे शिकायत है कामवाली बाई के फॉर्मेलिटी वाले टटके से भूकंप के बेवक्त डराने वाले झटके से नाख़ून के पास निकल आये मास के टुकड़े से कोस्मटिक मोहब्बत की मुस्कान लिए मुखड़े से मुझे शिकायत है हनी सिंह के justifications से अपने खुद के impatience से राजनीति को व्यवसाय बनाने वालों से अर्नब गोस्वामी के सरदर्द सवालों से मुझे शिकायत है परीक्षा से एक दिन पहले लाइट चले जाने से साथ लिए बैठे हैं जिसे उस गुजरे ज़माने से धोनी के आखिरी ओवर तक मैच लड़ाने से सैनिटेशन के एअरपोर्ट पर सिमट जाने से मुझे शिकायत है मोबाइल की बैटरी के खस्ताहाल से कलम के ना होते इस्तमाल से बॉस की रोज बढ़ने वाली expectations से iphone 6 वाली irresistable temptations से मुझे शिकायत है हॉस्पिटल की opd में लगी लम्बी कतारों से बाबाओं के अध्यात्मिक ज्ञान देते विचारों से मॉल में निरर्थक घूमती शामों से कॉर्पोरेट डिनर के दौरां टकराते जामों से मुझे शिकायत है फिल्मों की बेहूदा रेटिंग से एटीएम पे मिलने वाली वेटिंग से रात भर जगाने वाली बातों से बेबस कर देने वाले हालातों से मुझे शिकायत है बचपन में हो जाने वाली शादियों से आतंक का आशियाना बनी वादियों से सिसकियों में भीगे उस आँचल से प्यासों को तरसाने वाले बादल से मुझे शिकायत है सड़क चलते मुसाफिरों पे कीचड़ उडाती कार से पडोसी के घर से सुनाई देती रोज की तकरार से irctc के पेज में होने वाले हर बार के इन्तजार से खबर छुपाये इश्तहारों से भरे उस अख़बार से मुझे शिकायत है अपनी चादर से पैर बाहर निकालने से माँ को याद कर के सो चुके उस पालने से ट्रैफिक सिग्नल में कांच खटखटाते नन्हे हाथों से नजरे चुराने को विपरीत दिशा में होती बातों से मुझे शिकायत है खुद को धोखा देने वाले चहरो से मुंह खोल के दहेज़ मांगते सहरों से ट्रैफिक के बीच फंसी एम्बुलेंस से वयस्कों सी बाते करती इनोसेंस से मुझे शिकायत है तुम्हारे नकली मुस्कुराने से जानबूझ कर मजाक उड़ाने से सब कुछ जानते हुए तड़पाने से सच के दौरान आँख चुराने से शिकायतों के दौर ख़त्म हो जाने से भागते हुए इतवार को ना पकड़ पाने से पांच दिन फिर वोही पैसे कमाने से उनके खत्म होने पर हताश हो जाने से मुझे शिकायत है