राह मुश्किल सही, हौसला कीजिए

क्या किसी का यहाँ आसरा कीजिए


धर्म क्या, जात क्या देखिए खूबियाँ

फ़र्क़ अच्छे- बुरे में किया कीजिए


क्या पता कौन अपना मिले भीड़ में

हर किसी से ख़ुशी से मिला कीजिए


हो गई बेगुनाही भी साबित मेरी

सोच कर ही कोई फैसला कीजिए


उँगलियाँ जो उठाता है सब की तरफ

रू-ब- रू उस के भी आइना कीजिए


इस नये दौर का है तक़ाज़ा यही

साथ दुनिया के 'हिमकर' चला कीजिए


~हिमकर श्याम