लोग रखते गुमान क्या, मत कह

वो न समझेंगे माजरा, मत कह


कोई सुनता नहीं किसी की अब

कहने से क्या है फ़ाएदा, मत कह


जानता है न हश्र क्या होगा

पर इसे पैंतरा नया, मत कह


किसके हक़ में वो फ़ैसला लेता

कोई खुल कर न बोलता, मत कह


उसकी नीयत न साफ लगती है

देखता सिर्फ़ फ़ाएदा, मत कह


हर तरफ़ बे-हयाई का मंजर

कुछ नहीं है ढका छुपा, मत कह


मीठी बातों से सबको लूट लिया

कितना शातिर है रहनुमा, मत कह


दौरे हाज़िर का यह तकाज़ा है

झूठ क्या और सच है क्या, मत कह


मुल्क अपना बदल रहा 'हिमकर'

है यक़ीं या मुग़ालता, मत कह


~ हिमकर श्याम