हुआ युद्ध अब जो तो ,
वह युद्ध नहीं रण होगा ,
परिणाम जिसका भीषण होगा,
विकट विकराल होंगी परिस्थितियां,
जब भिड़ेंगी दो विश्व की शक्तियां,
रक्त की नदियां उफान बन उठेंगी,
होगा खात्मा सभ्यताओं का,
जब शोले बरसेंगे क्षितिज से,
चहुं ओर त्राहि त्राहि होगी,
छती जान मान की होगी,
डूबेगी अर्थव्यवस्था सदियों तक ,
वीरों की छलनी होंगी छातियां ,
माओं की कोखें उजड़ेगी,
धरा पर पर मिर्त्यू का संगम उमड़ेगा,
मिलन हुआ जो सेना का फिर,
बेग प्रचंड बिजली बन घुमड़ेगा ,
वक़्त अभी भी है चेतो सरकारों ,
सुलझा लो बातों को बातों से,
हुआ युद्ध अब जो तो,
वह युद्ध नहीं रण होगा,
परिणाम जिसका भीषण होगा।।
~ हिमांशु आर्य


