ओ मां

फिर आज मैने रात तारों को देख कर गुजारी, 

क्यूंकि बचपन से जो सुन रहा हूं ,

मां तो तारा बन गई है,

मैं तब से इन तारों को देखता हूं खोजता हूं,

तलाशता हूं तेरी वो मुस्कान ,

जो कभी मैंने देखी थी ,

मैं तेरी गोद में सर रख कर रोना चाहता हूं ,

मै थक गया हूं मां अब सोना चाहता हूं ,

जाने कितना भी तुझे भूलने की कोशिश करूं,

फिर भी तू हमेशा मेरे जहन में रूह की तरह समाई है,

तेरे यादों के सहारे जो जीता हूं जिंदगी ,

वो कभी कभी बोझ सी दिखाई देती है,

हां मुझे फिर तेरी याद आ रही है मां,

तू जाने क्यूं मुझे छोड़ गई ,

क्या में इतना बुरा हूं मां,

जो तू मुझ से बीच राह में ही मूंह मोड़ गई,

वापस आ जाओ ना मां,

मैं अब तुझे कभी भी परेशान नहीं करूंगा,

मैं वो दूध का गिलास पूरा खाली करूंगा ,

और अब तो मैंने फूल तोड़ना भी छोड़ दिया ,

वापस आ जाओ ना ,

मुझे बस एक बार सीने से लगा जाओ मां,

ओ मां।।


~ हिमांशु आर्य