हम तुझे इक रोज़ ज़रूर भुलायेंगे,

तेरे दिए हर ज़ख़्म का सदका करेंगे,

और तेरे दिए दर्द में मुस्कुराएंगे।


तेरी हर याद को इकट्ठा करेंगे और,

एक एक करके उसे लाश की तरह जलाएंगे।


जहां से हमें हमारी ही आह ना सुनाई दे,

तेरी यादों को उस गुमनाम मोड़ पर छोड़ आएंगे।


धोखा तूने किया है... क़यामत के रोज़ शर्मिंदा तुझे होना है,

हम तो खुदा के सामने अहल-ए-वफ़ा कहलाएंगे।


तू आज धोखेबाज हुआ तो क्या!!

हमें आज भी तेरे साथ बिताई रातों पर नाज़ है,

हम कल भी तेरे साथ हुई सुबहों पे इतराएंगे।


अब जो तू लौटा तो तेरे लौटने का ग़म होगा हमें,

अब हम अकेले ही दिल उजड़ी दुनिया सजाएंगे।


और... जबतक तुझे भूलते नहीं हम,

तेरी यादों को इकट्ठा करेंगे,

तुझसे नफ़रत करने के काम में लाएंगे।