चूमकर माथा

पालने में छोड़ आया

चलना सीखा ही था

यहाँ वहाँ था डोल रहा


ख़त में पढ़ा था

जोड़ा दाँत आया

तुतलाना सीखा ही था

ज़ुबान था खोल रहा


आँगन में खड़ा था

काँधों पे तिरंगा घर आया

बोलना सीखा ही था

जय हिंद था बोल रहा


गुमसुम सा पड़ा था

सत्कार समारोह में आया

गिनना सीखा ही था

तमग़े था तोल रहा

सलामियों में सपने घोल रहा


मासूम सी आँखों में

मोती सा आँसू आया

जश्न सीखा ही था

गर्व साहस बटोर रहा

वर्दी टटोल रहा


रंगरूट... बोल रहा

-Himanshu (Harshvardhan) Joshi