किसी ने
विरासत में पायी रोटी
किसी ने
बलिदान की बनायी रोटी
किसी ने
मेहनत की खायी रोटी
किसी ने
झूठ से कमायी रोटी
किसी ने
लूट के जुटायी रोटी
किसी ने
हवस में भुलायी रोटी
किसी ने
लालच में गँवायी रोटी
ख़ुशक़िस्मत हैं जो
बाइज़्ज़त कमायी खायी रोटी
बदक़िस्मत है वो
खुद भूखा है जिसने उगायी रोटी
~हिमाँशु (हर्ष) जोशी


