ना मुसलमान की तरह मुझको दफनाया जाए और ना ही हिन्दू की तरह मुझे जलाया जाए इस जमीन में ज़िंदा मुझे बस रखना कुछ ऐसे कि इश्क़ बनकर दिलों में अब मुझे बसाया जाए बहुत हो चुका है दौर यहाँ अब तो नफरतों का फिर से क्यों ना इन सबको इंसान बनाया जाए करें कोशिश हम सभी अब कुछ इस तरह से किसी बच्चे को अब कहीं भूखा ना सुलाया जाए जो अनजान हमको निवाले देता रहा आज तक उस किसान को अब ऐसे मरने से बचाया जाए कोई खता जो मैंने की हो गर तुझको बताने में बेहतर है फिर तेरे तरीके से मुझे समझाया जाए जो आज खामोश हैं यहाँ सारे फसाद देखकर उनकी ख़ामोशी को अब कैसे भी मिटाया जाए लोग भी भूल गए हैं शायद दास्तान ए हिन्द की चल हिन्द को फिर हिन्द से आज मिलाया जाए खुश हो रहे हैं जो केसरिया हरे को बांट कर उनको हर कौम से बस इतना ही सुनाया जाए ये मुल्क हमारा खून है और मुल्क हमारी जान है तिरंगा है हर दिल यहाँ चाहे चीर के दिखाया जाए दर्द जो है मेरा रख ही दिया यूँ आज निकाल कर और कैसे "इश्क़" का फ़साना तुमको सुनाया जाए