वैभवी के जब तीसरे बच्चे को जन्म होने वाला था, वो बड़ी चिंता में रहती थी। अगर इस बार भी बेटी हुई तो?

अक्सर सवालों का सैलाब उसके मन में उमड़ता , फिर वो अपनी रोज़ मरा को ज़िंदगी में उलझ जाती।

खुशियों ने दस्तक दी, बेटा हुआ। दो लड़कियों के बाद बेटा होने के कारण भी खुशी दुगनी थी।

वैभवी कृष्ण की बड़ी भक्त थी। डिलिवरी के बाद मंदिर में दर्शन करने पहुंची तो इस बार खुशी, सवाल, आदर, प्यार सब साथ में था।

कृष्णा की चमकती आंखों में देखते हुए उसने पूछा, कान्हा जब तुमने मेरे घर आना ही था, तो पहले क्यों नहीं आए? मेरी बच्चियों ने बड़े तानहे सुने हैं, तुम तो सब जानते हो।

कृष्णा मुस्करा कर बोले, मैं पहले आ जाता तो तुम दुनिया की असलियत से रूबरू कैसे होती।