अपने हुस्न पे जब शाख इतराने लगी
पत्तियों ने गिर कर सारी कहानी बयां कर दी।
जब शाख का घमंड नहीं रहा
तो सूखे पत्तों की बिसात क्या?
मदमस्त हवा के झोंके से कुछ इस तरह उलझे
सूखे पत्ते ही तो थे, उड़ते ना, तो क्या करते।


अपने हुस्न पे जब शाख इतराने लगी
पत्तियों ने गिर कर सारी कहानी बयां कर दी।
जब शाख का घमंड नहीं रहा
तो सूखे पत्तों की बिसात क्या?
मदमस्त हवा के झोंके से कुछ इस तरह उलझे
सूखे पत्ते ही तो थे, उड़ते ना, तो क्या करते।