पेड़ के नीचे छाँव तले।
जब आधी-आधी रात ढले।।
चाँद खिले जब सूरज ढले।।
फिर आधी पूरी रात चले।।
कुछ और मवेशी खड़े हुए है।
कुछ पंछी उन पर उमड़ रहे है।।
कुछ किट चंचु में सिमट रहे है।
जिस ओर ठंडी हवा चले।।
पेड़ के नीचे छाँव तले।
जब आधी-आधी रात ढले।।
कभी भरी दुपहरिया पेड़ो की झुरमुट।
कुछ छोटे इठलाते नन्हे बच्चे।।
कुछ पेड़ो के कुछ पशुओ के।
झुण्ड में यु ही उलझ रहे।।
पेड़ के नीचे छाँव तले।
जब आधी-आधी रात ढले।।
कुछ हवाए भी नर्म हो जाती है।
रुख अपना वो छोड़ जाती है।।
कभी पानी के कुण्डों से टकराकर वो।
कुछ नमी खुद में जोड़ जाती है।।
ये शीतल वायु घन-घोर चले।
जैसे बारिश की कोई लौर चले।।
पेड़ के नीचे छाँव तले।
जब आधी-आधी रात ढले।।
®(हैयान)