सूरज ढल जाए। कभी शाम हो जाए। छत पे हम दोनों की कभी मुलाकात हो जाए।। तुझे थाम के बैठु कभी सीने के भीतर। पहरो में बीतते हुए कभी रात हो जाए।।
तेरी पलकों में सपने कभी मेरा नक्श हो जाए। तुझे गोदी में सुला दू कभी मुझे प्यार हो जाए।। तुझे चाँद भी ला दू कभी सितारों की ओट से। फिर ठंडी ये सुन्दर रात हो जाए।।
सुबह तक तेरी करवटे कभी जुल्फे पलट जाए। तेरी पलकों पे कभी लबो पे शबनम आ जाए।। तेरी आँखों में कभी बाँहो में अलसुबह में ही रहूं। सूरज भी तुझे बाद में देखे उससे पहले कही छाँव हो जाए।।
दिन भर यु ही कटता रहे कभी आसमाँ में बादल हो जाए। धुप छाँव चलती रहे कभी हलकी फुहारों से मन भीग जाए।। जिंदगी कटती रहे बस हर एक मोड़ पे यु ही। तेरी जिंदगी में मुझे मेरा मुकम्मल मुकाम मिल जाए।। ®(हैयान)


