ना मैं जानू,
छोड़ के बंधन सब,
हो के दूर अब,
वो जा चुका है।
दिल का दरिया,
तैर ने वाला,
डूब के इससे,
पार आ चुका है।
मानू ना मैं, कैसे कोई,
बंधन बांध के,
मुक्त हुआ है।
जब से मेरा,
हाथ पकड़ कर,
चौराहे से , वो जा चुका है।
शोर ही शोर है,
चोरों और अब,
सब ओर तेरा,
नाम दिख रहा है।
साथ ना दे रही,
आंखे मेरी,
इन में दिल का, अश्क भरा है।
हो ले जा, पकड़ के,
इस दीवाने को,
हाथ पकड़ने वाला,
वो जा चुका है।
ना मैं जानू,
छोड़ के बंधन सब,
हो के दूर अब,
वो जा चुका है।
®(हैयान)
