घुमड़-घुमड़ आवत मन मौरा देखि चितवन नन्द किशोरा। देखि घन-श्याम आंगन मौरा। आवत पिकुह करि घन मोरा। आवत अनेक बहुल पशु-पक्षी। लगत पुकारन घन बहु लक्षी। एक आवत या अनेक आवत। मौरी अखियां समझ न पावत। घन आवत, घन-श्याम आवत। दूजी दूजी सबै पुकारत। मौरा हिरद तृप्त हो जावत। अनेकानेक घनश्याम पावत। ®(हैयान) 10:17 सांय 24 मार्च, 2017 अर्हम पैलेस, उदयपुर।