कुछ नहीं कहना चाहती,
केवल मौन रहना चाहती हूँ
केवल “मौन”
क्योंकि जानती हूँ
मौन का अर्थ
कोई नहीं समझ पाएगा,
मन का भाव कोई
परख नहीं पाएगा…
शब्दों से संभवतः
मन में चल रही अनंत
दुविधाओं का अंत होगा…
दुविधाओं का अंत हुआ
तो सब कुछ समाप्त
हो जाएगा…
बस इसी असमंजस में
मैंने चुना है केवल मौन…
चूँकि संवाद हुआ
तो युद्ध होना निश्चित है !
~हेतल

