ऐ खुदा ! ज़िन्दगी में चाहा तोह बहुत एक अच्छाई का दिया जलाने के लिए,
पर दिया तोह न बन सके बस जरिया बन जाते है
तेरे इस दरिया जैसे दिल में रख ले मुझे
और मेरी ज़ुब को तेरी जुबा का एक जरिया दे दे
दिल नहीं लगाया करते इस दुनिया में किसी से,
क्युकी हम मुसाफिर तोह बस जरिया है लोगो की मंजिलो का
सुकून की तलाश में, अल्फ़ाज और लफ्जो की ज़रूरत नहीं
क्युकी उन लेहरो और कश्ती को किनारे तक पहुंचने का ज़रिय हु में
ज़िन्दगी जीने का नजरिया बदल दे वैसा जरिया हु में
प्यार तू, हया तू , दुनिया तू, बस जरिया हु में, बस तेरा एक जरिया हु में.


