तेरा ख्याल दिल से जा नहीं सकता

मैं चाह कर भी तुझको भुला नहीं सकता

 

वो तेरी हंसी, हर अदा और जो मुस्कान है

बातों का अलग अंदाज़ तेरा ही तेरी पहचान हैं

डूबा रहता हूँ समंदर से गहरी तेरी यादों में,

क्या तू मुझे किनारे पर ला नहीं सकता।


तेरा ख्याल दिल से जा नहीं सकता

मैं चाह कर भी तुझको भुला नहीं सकता


गालों के तिल की क्या मैं बात करूं,

अटके हैं इसमें सौ जज्बात क्या कहूं

धड़कने गढ़ रही हैं गीत तेरे इंतज़ार में,

क्या तू कभी गुनगुनाने आ नहीं सकता


तेरा ख्याल दिल से जा नहीं सकता

मैं चाह कर भी तुझको भुला नहीं सकता


कभी रेत पर, कभी किताबों में लिखा तेरा नाम,

अब लिखा है दिल पर मिटाया जा नहीं सकता,

कहीं थक ना जाऊं सपने बुन-बुन कर हमारे,

क्या तू इन्हे हकीकत में बदलने आ नहीं सकता।


तेरा ख्याल दिल से जा नहीं सकता

मैं चाह कर भी तुझको भुला नहीं सकता


- हेमंत