रक्त नहीं बहाया था तुमने,
सिंदूर को ललकारा था,
आंसू नहीं बहाये थे देख लो,
अंगारों को पुकारा था,
उन्हीं चिताओं की राख से,
बना कर ज्वालामुखी हमने,
आज आसमान सिंदूरी कर दिया,
तेरे नापाक इरादों को मजबूरी कर दिया,
कान खोल के सुन ले पाक...
प्रतिशोध की अग्नि अभी भी ज्वलंत है,
भारत मां के हाथों से लिखा अब तेरा अंत है।
- हेमंत

