नेह तुम्हारा है नभ सा विस्तृत,
अनंत, अनूठा और अप्रदर्शित,
संघर्ष और समर्पण के प्रतीक,
गर्व और गौरव तुम में निहित।
मेरे ख्वाबों को पंख लगाने,
अस्तित्व को देने एक पहचान,
अविरल धारा से बहते रहे वो,
कभी दिखाई न अपनी थकान।।
निभाये दायित्व संग स्वाभिमान,
न जाने त्यागे कितने अरमान,
नवनीत हृदय पर मजबूत जैसे ढ़ाल,
हौंसले और हिम्मत की अद्भुत मिसाल।।।
-हेमंत

