कौन हो तुम मुझको बतला दो, 

जरा दिल को मेरे सुकून मिले...


बचपन दस का, सोलह का यौवन, 

हर दौर तुम्हीं में मशगूल मिले,

ठहराव झील सा, मिठास गजल सी,

दिल को छूते कुछ उसूल मिले, 


कौन हो तुम मुझको बतला दो, 

जरा दिल को मेरे सुकून मिले...


झलक तुम्हारी मिली जब-जब, 

दिल में ख़्वाहिशों के हुजूम चले,

सोहबत में तुम्हारी तुम क्या जानो, 

प्रीत का इक नया जुनून खिले,


कौन हो तुम मुझको बतला दो, 

जरा दिल को मेरे सुकून मिले...


ज़ज्बातों पर जमी बर्फ जब पिघले, 

तुम कुछ ना बोलो, पर मैं सुन लूँ, 

बात अपनी चले, कम हों फासले,

बस यूं ही शब हो फिर सहर निकले,


कौन हो तुम मुझको बतला दो, 

जरा दिल को मेरे सुकून मिले...


-हेमंत