आओ मिलकर हालात बदलते हैं,
हवाओं में घुलता ज़हर है,
अंधियारों से पटा शहर है
एक दीप जलाकर आओ हम-तुम,
कुछ उजियारा करते हैं,
आओ मिलकर हालात बदलते हैं ,
एक युद्ध मन के भीतर है,
दूजा है सीमा पर जारी,
नफरतों के इस जहर की दवा,
आज प्यार से करते हैं,
आओ मिलकर हालात बदलते हैं,
महामारी से डरा इंसान,
सरकारों से त्रस्त किसान,
परेशानी भरे इन सफरों को भूल,
थोड़ा आराम करते हैं,
आओ मिलकर हालात बदलते हैं,
किसी गरीब को गले लगाकर,
किसी बच्चे की हंसी लौटाकर,
तोड़ कर भेदभाव की इकाईयां,
सौहार्द के रंग भरते हैं,
आओ मिलकर हालात बदलते हैं।।
- हेमंत

