स्वर्णिम रूप से दमक रही वो,
धवल कुमुदिनी सी एक नार,
चंचल नयनों में एक अनुराग,
चितवन से झरता मधुर संवाद,
देख कर उसकी अप्रतिम काया,
यूं लगे बसंत करे उसका श्रृंगार,
धवल कुमुदिनी सी एक नार,
गालों पर आभा का दर्पण,
ठोड़ी का तिल एक आभूषण,
शरद चांदनी सी निर्मल है वो,
जब मिले तो बरसे प्रेम फुहार,
धवल कुमुदिनी सी एक नार,
केशों में समेटा है अम्बर,
रूप संदली, कुमुद से अधर,
प्रणय रागिनी के जैसा माधुर्य अपार,
मुस्कान उसकी एक अनमोल उपहार,
धवल कुमुदिनी सी एक नार
- हेमंत

