तुम कृष्ण हो
मेरे घर
(मथुरा मधुवन) के महकते फूलों की देख रेख हो
मेरे स्वभाव का तुम ही तो उल्लेख हो
बहन सुभद्रा के भ्राता
तुम मेरे अनुज
तुम ही मेरे जेष्ठ हो...
तुम मधुर बांसुरी की तरंगों का लक्ष्य हो
तुम अर्जुन को सिखाया हर उद्देश्य हो
मेरे मन का तुम मिटाते हर वहम, हर द्वेष हो
घोर अंधेरे में सूरज की पहली किरण का प्रवेश हो
तुम सर्वोपरि
हर उत्तरदायित्व निभाने में
तुम श्रेष्ठ हो....


