सब को हँसा के खुद को हँसा नहीं पाता हु
हालातो से लड़ लेता हु पर अपनों के तानों से हार जाता हु
रात को सब सोच के आखो को रुलाता हु
सुबह फिर एक मुस्कान के साथ जग जाता हु....
कभी हिम्मत नहीं हारा हु मै
माँ बाप का सहारा हु मै
हर कदम पे एक चुनौती से टकराता हु
अपनों के वास्ते सब ख्वाहिशें लुटाता हु....
पल पल टूट के मज़बूत होता जाता हु
गिर कर खुद ही संभल जाता हु
कभी तारीफ़ नहीं करना मेरी
मै तो बेटा होने का कर्तवय निभाता हु.....


