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पाखंडी समाज


दो बातें,दो विचार,दो चेहरे लगा के घूमने वालाये पाखंडी समाजमेरा, आपका, हम सब का संगठन हैजिसका दोगलापनउसकी जरूरतों के अनुसारविचारधारा से ज़ाहिर होता हैजैसे किबहुओं से बेटा चाहिएऔर गायों से बछिया...!!

— अनुभव मिश्रा
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