दो बातें,दो विचार,दो चेहरे लगा के घूमने वालाये पाखंडी समाजमेरा, आपका, हम सब का संगठन हैजिसका दोगलापनउसकी जरूरतों के अनुसारविचारधारा से ज़ाहिर होता हैजैसे किबहुओं से बेटा चाहिएऔर गायों से बछिया...!!