आधी रात को जब आँख खुली तो
टहलते हुए मैं बालकनी में चला गया
मैंने देखा कि जितनी गहरी रात है
उससे भी गहरी नींद में है सारा शहर
मैंने जेब से अपना पर्स निकाला
और पर्स से निकली एक तस्वीर
निहारते हुये उस तस्वीर को
मैं वहीं कुर्सी पर बैठ गया
कुछ ही देर में मैंने महसूस की
तुम्हारे बदन की वो सोंधी सी खुशबू जो
शहर के हर एक मकान से उठ रही थी
मैंने सोचा शायद खुदा ने भी
तुम्हीं को दे रखी है
दुनिया में मोहब्बतों के
ख्वाब बांटने की जिम्मेदारी...!
आधी रात को जब आँख खुली तो
मैं हड़बड़ा कर जाग उठा
मैंने उंगलियों को टटोला तो
तस्वीर की जगह कलम थी
और दूसरे हाथ में थी वो डायरी
जिस पर तुम्हारे नाम की कविता
लिखते लिखते मेरी आंख लग गई थी.
अनुभव मिश्रा ✍️❤️
#Heartlyimaginations


