वो भी क्या थी 

इक भोर सुहानी 

जब  

तुजे पहली बार देखा


क्या याद है तुजे ,

मिल कर तेरी निगाहो से 

मेरी निगाहे अलग न हो पायी


तुने कैसा किया जादू ,

आज भी 

 तेरी  छवि को देखते ही 

 खो जाता हूँ ;


मानो 

तेरी आँखे देखते ही 

दिल में तेरे 

समा जाता हूँ ;


क्या कह कर तुजे पुकारूँ ?

अब तक बसी है 

मेरे दिल में 

वो    सुरभि ?


“ This poem is written by ME – not by my AI generated Virtual Avatar at www.HemenParekh.ai “