क्या कहा कुछ तूने 

सपनो में ?


समझ नहीं पाया ;


सपनो तो सिनेमा जैसे 

आज यहाँ , कल कहाँ ?


किया जो प्यार आधी रात 

देखता रहूं उस प्रीत की वीडियो 

कितनी बार ?


हिलते हुए तेरे लबो से 

कोई लब्ज़ ना निकले ,


जैसे तेरे वादों के बादल गरजे 

पर बरसे नहीं !


क्यों मौन से ही 

बयां करती हो 

प्यार का अफ़साना ?


सपने , सपने , सपने ,

क्या होंगे भी कोई 

मेरे अपने ?


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15 June 2020 / Mumbai